Hindi Articles

कहीं मनुष्य कुत्ते से भी गया – गुजरा तो नहीं?

हाल ही में रोम के पोप श्रीमान् फ्रांसिस ने अपने अनुयायियों से धार्मिक सहिष्णुता की आवश्यकता पर बल दिया। अलग – अलग धर्मों में भगवान् के विभिन्न नामों के विषय में उन्होंने कहा, “ये सब नाम उस एक व्यक्ति हैं जिसे विश्वभर में भिन्न – भिन्न नामों से पुकारा जाता है। सदियों से अपने धर्म …Read More

गिरते चरित्र, गिरता मतदान

आज लोगों का नेताओं और सरकारों से विश्वास उठने लगा है। कुछ की दृष्टि में मतदान केवल एक मानसिक सन्तुष्टि है कि “मैंने अपने राज्य के मुख्यमंत्री का चुनाव किया।” किन्तु वास्तविकता तो यह है कि सभी एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं। लोग जान चुके हैं कि कोई भी सरकार सत्ता में क्यों न …Read More

क्या भगवान् हैं?

इस संसार में भगवान् की सत्ता को सदैव चुनौतियाँ मिली हैं। सतयुग में हिरण्यकश्यपु -हिरण्याक्ष, त्रेता में रावण-कुम्भकरण तथा द्वापर में कंस- शिशुपाल जैसे असुर इसके कुछ उदाहरण हैं। किन्तु कलियुग कुछ अलग है। पूर्व युगों में लोग जानते थे कि भगवान् का विरोध करने वाले ये लोग असुर हैं, किन्तु कलियुग में भगवद्विरोधी लोग …Read More

मटके के छेद

विश्वभर के नेताओं द्वारा शांति के अथक प्रयासों के बाद भी चारों ओर अशांति और अराजकता छायी है। पिछले कुछ वर्षों से प्रायः प्रतिदिन विश्व  के किसी – न – किसी भाग में आतंकी हमले हो रहे हैं और ये निरन्तर बढ़ते जा रहे हैं। हमारे इतने प्रयास करने पर भी समाज में शांति क्यों …Read More

विष से विषैला

आज भारत भर में मैगी चर्चा का विषय बनी हुई है। दशकों से प्रायः प्रत्येक घर का यह मनपसंद खाना आज कटघरे में खड़ा है। और क्यों न हो? हमारे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी व्यक्ति अथवा वस्तु को हम सहन नहीं कर सकते। आखिर जान है तो जहान है! मैगी में …Read More

एकलव्य : गुरूभक्त या गुरूद्रोही?

यदि एकलव्य के मन में गुरू के प्रति इतनी निष्ठा थी तो उसने उसके पहले आदेश  का उल्लंघन क्यों किया? अधिकांश लोग एकलव्य की गुरूभक्ति को आदर्श मानते हैं। परन्तु अकसर वे एकलव्य की चेतना में बैठे एक प्र्र्रमुख दोष को नहीं देख पाते। गुरूभक्ति का मुखौटा पहनकर वास्तव में एकलव्य ने गुरू के प्रति …Read More

नरक की मौज

श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वरती ठाकुर (1874-1937) के अन्तर्धान होने के पश्चात् उनके शिष्यों  ने सरस्वती ठाकुर द्वारा लिखे पत्रों एवं पुस्तकों तथा प्रवचनों से कुछ उपदेशक कथाओं का संकलन किया। उन्होंने इस पुस्तक का नाम रखा – उपाख्याने उपदेश। इन सरल लघु कथाओं के माध्यम से उन्होंने कृष्णभावनामृत  के विभिन्न सिद्धान्तों को प्रबलता से स्थापित किया। …Read More

क्या आपने अपना धनुष तोड़ दिया है?

किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को उसके अनुकूल कार्यों का ध्यान रखना होता है। अनुकूल कार्यों को स्वीकार करना और प्रतिकूल को त्यागना। इन्हें स्वीकारने अथवा त्यागने में कितनी भी कठिनाई क्यों न हो, सफलता के लिए इन्हें करना अनिवार्य हो जाता है। मोटे तौर पर इसे तपस्या कहा जाता है; …Read More

गंगा का तट

एक लम्बी पारी खेलकर सचिन ने अन्ततः मैदानी क्रिकेट से संन्यास ले लिया। हर सच्चे भारतीय को उनपर गर्व है। एक ओर सरकार तथा अनेक संस्थाओं ने नाना प्रकार से इस नायक को महिमामण्डित किया तो दूसरी ओर उनके प्रशंसकों ने उन्हें क्रिकेट के भगवान्” की उपाधि दे डाली। यदि आप सचिन ने फैन हैं …Read More

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This is an institution established under the guidence of His Divine Grace A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada, Founder and Acharya of International Society for Krishna Consciousness (ISKCON), spreading the teachings of Bhagavad Gita

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